Thursday, December 22, 2016

इक लाज जरूरी है

सबकी पहचान अलग अंदाज जरूरी है
पर आँखों में हरपल इक लाज जरूरी है

कल किसके वश में है जो बीता या आए
कल जो भी है करना वो आज जरूरी है

हो कोशिश दिल से तो अंजाम भला होगा
हर हालत में बेहतर आगाज जरूरी है

कुछ गिन चुन के चेहरे आते हैं सुर्खी में
उठना मजलूमों की आवाज जरूरी है

जो होश की बातें भी बेहोशी में करते
झांको उसके दिल में क्या राज जरूरी है

साँसें जबतक चलती सुख दुख आते जाते
जो बांट सके गम को हमराज जरूरी है

हक अपना पाने को संघर्ष सभी करते
हर हाल 'सुमन' मीठा अल्फाज जरूरी है