Thursday, December 22, 2016

इक लाज जरूरी है

सबकी पहचान अलग अंदाज जरूरी है
पर आँखों में हरपल इक लाज जरूरी है

कल किसके वश में है जो बीता या आए
कल जो भी है करना वो आज जरूरी है

हो कोशिश दिल से तो अंजाम भला होगा
हर हालत में बेहतर आगाज जरूरी है

कुछ गिन चुन के चेहरे आते हैं सुर्खी में
उठना मजलूमों की आवाज जरूरी है

जो होश की बातें भी बेहोशी में करते
झांको उसके दिल में क्या राज जरूरी है

साँसें जबतक चलती सुख दुख आते जाते
जो बांट सके गम को हमराज जरूरी है

हक अपना पाने को संघर्ष सभी करते
हर हाल 'सुमन' मीठा अल्फाज जरूरी है

शहर हुआ बदनाम किसी का

अल्ला मेरा, राम किसी का
यूँ चलता क्या काम किसी का

इक मालिक फिर डर है कैसा

जप लो चाहे नाम किसी का

चिन्गारी बाहर की आती

शहर हुआ बदनाम किसी का

मेहनत करनेवाले भूखे

होता है आराम किसी का

मेरा फैसला, किसे चुनेंगे

पर आता पैगाम किसी का

करे शरारत, वो सुर्खी में

बुरा हुआ अंजाम किसी का

'सुमन' कीमती, कौन पूछता

बढता रहता दाम किसी का

मौसम बदल रहा है

मौसम बदल रहा है

बदली है यूं सियासत मौसम बदल रहा है
इन्सान को ही इन्सां जैसे निगल रहा है

तकरीर गढते सारे अपने हिसाब से ही
हालात उससे बदतर जैसा कि कल रहा है

जो बैठते हैं चुन के शासन के मंदिरों में
गाली गलौज करते संसद फिसल रहा है

हाथों में ले के माचिस बातें अमन की करते
ऊपर से ठीक लगता अन्दर से जल रहा है

पीछे सुमन ये कितना जाएगा देश अपना
दुनिया में देश ऐसे गिर के सम्भल रहा है

"हिन्दी काव्य संकलन": श्यामल सुमन के मुक्तक

"हिन्दी काव्य संकलन": श्यामल सुमन के मुक्तक: नाम : श्यामल किशोर झा,लेखकीय नाम : श्यामल सुमन,जन्म तिथि : 10.01.1960  जन्म स्थान : चैनपुर, जिला सहरसा, बिहार, भारत शिक्षा : एम० ए० - ...

यह आयोजन सरकारी है

अच्छे दिन की तैयारी है
या रोने की फिर बारी है

क्यों दशकों से छले गए हम
नादानी या लाचारी है

वादे बदले, शासक बदला
जनता अबतक बेचारी है

कौन धरम है ऊंचा, नीचा
इस पर भी मारामारी है

मानवता भी गयी रसातल
यह आयोजन सरकारी है

दहशतगर्दी बढती जाती
कारण घर घर बेकारी है

लूटा जिसने देश अभीतक
नेता, मंत्री, अधिकारी हैं

इसे कहें क्यों सहनशीलता
सच पूछो तो बीमारी है

अब तो जागो देशवासियों
'सुमन' व्यवस्था हत्यारी है