Wednesday, January 3, 2018

#lifestick Follow my writings on https://www.yourquote.in/mina_sanghi #yourquote

Friday, December 15, 2017

कभी तो तेरे.......

दर्द कब किसका सगा हुआ इसने भी
उड़ जाना है एक दिन बनकर धुँवा, भूल जा जो हुआ सो हुआ , कभी तो तेरे भी काम आएगी किसी की दुआ,

कब तक असर करेगी ज़माने की बद्दुआ
हर कोई यहाँ से गया जो था यहाँ आया,
हमेशा आग बुझने पर निकालता है धुँवा.
कभी तो तेरे भी काम आएगी किसी की दुआ,

क्या हुआ गर तेरा कोई नहीं हुआ
जीतता वही है जो अकेला है जीया,
ख़ुशी पायी उसने जिसने गम को है पीया.
कभी तो तेरे भी काम आएगी किसी की दुआ,

गीता ने कहा जो हुआ अच्छा हुआ,
फिर तू क्यूँ है सोच में डूबा हुआ ,
जीवन वरदान है भगवान का दिया हुआ.
कभी तो तेरे भी काम आएगी किसी की दुआ,

कदम ना हटा पीछे जो आगे बढ़ा दिया, ना डर तू दुनिया से ना कदम को तू डगमगा तू ही है रौशनी तू ही है दीया, कभी तो तेरे भी काम आएगी किसी की दुआ !!
-
" प्रवेश "

कुछ तबियत........

कुछ तबीयत ही मिली थी ऐसी
चैन से जीने की सूरत ना हुई
जिसको चाहा उसे अपना ना सके
जो मिला उससे मुहब्बत ना हुई

जिससे जब तक मिले दिल ही से मिले
दिल जो बदला तो फसाना बदला
ऱसम-ए-दुनिया की निभाने के लिए
हमसे रिश्तों की तिज़ारत ना हुई

दूर से था वो कई चेहरों में
पास से कोई भी वैसा ना लगा
बेवफ़ाई भी उसी का था चलन
फिर किसीसे ही श़िकायत ना हुई

व़क्त रूठा रहा बच्चे की तरह
राह में कोई खिलौना ना मिला
दोस्ती भी तो निभाई ना गई
दुश्मनी में भी अदावत ना हुई

- निदा फाड़ना.

Sunday, December 10, 2017

वजह की तलाश न कर.........

अपने गम की नुमाइश न कर,
अपने नसीब की आजमाइश न कर,
जो तेरे है वो तेरे पास खुद आयेंगे,
हररोज उन्हें पाने की ख्वाहिश न कर,
छू ले तू आसमान जमीं की तलाश न कर,
जी ले.... तू ज़िन्दगी... ख़ुशी की तलाश न कर, तक़दीर बदल जायेगी अपने आप ही, ए दोस्त, मुस्कुराना सीख ले, वजह की तू तलाश न कर !!

अंतर्मन

*【अंतर्मन】*
                                                                                     घनघोर अंधेरा छाये जब
कोई राह नज़र ना आये जब
कोई तुमको फिर बहकाये जब
इस बात पे थोड़ी देर तलक
तुम आँखें अपनी बंद करना
और अंतरमन की सुन लेना
मुमकिन है हम-तुम झूठ कहें
पर अंतरमन सच बोलेगा..........

जब लम्हा-लम्हा 'आरी' हो
और ग़म खुशियों पे भारी हो
दिल मुश्किल में जब पड़ जाये
कोई तीर सोच की 'अड़' जाये
तुम आँखें अपनी बंद करना
और अंतरमन की सुन लेना
मुमकिन है हम-तुम झूठ कहें
पर अंतरमन सच बोलेगा........

जब सच-झूठ में फर्क ना हो
जब गलत-सही में घिर जाओ
तुम नज़र में अपनी गिर जाओ
इस बात पे थोड़ी देर तलक
तुम आँखें अपनी बंद करना
और अंतरमन की सुन लेना
मुमकिन है हम-तुम झूठ कहें
पर अंतरमन सच बोलेगा........

ये जीवन एक छाया है
दुख, दर्द, मुसीबत माया है
दुनिया की भीड़ में खोने लगो
तुम खुद से दूर होने लगो
तुम आँखें अपनी बंद करना
और अंतरमन की सुन लेना
मुमकिन है हम तुम झूठ कहें
पर अंतरमन सच बोलेगा........

~~~  अनाम ~~~

Saturday, November 25, 2017

कुछ भूलें........

कुछ भूलें ऐसी हैं, जिनकी याद सुहानी लगती है।
कुछ भूलें ऐसी जिनकी चर्चा बेमानी लगती है।

कुछ भू्लों के लिये शर्म भी आई हमको कभी-कभी,
कुछ भूलों की पृष्ठभूमि बिल्कुल शैतानी लगती है।

कुछ भूलों की विभीषिका से जीवन है अब तक संतप्त,
कुछ भूलों की सृष्टि विधाता की मनमानी लगती है।

कुछ भूलें चुपके से आकर चली गईं तब पता चला,
कुछ भूलों की आहट भी जानी पहचानी लगती है।

कुछ भूलों में आकर्षण था, कुछ भूलें कौतूहल थीं,
कुछ भूलों की दुनियाँ तो अब भी रुमानी लगती है।

कुछ भूलों का पछतावा है, कुछ में मेरा दोष नहीं,
कुछ भूलें क्यों हुईं, आज यह अकथ कहानी लगती है।

~ कुछ भूलें ऐसी हैं जिनकी याद सुहानी लगती है / अमित

Monday, October 9, 2017

ये है कैसा करवाचौथ…???
ये है कैसा करवाचौथ…???

पति के हाथों पिटती जाए…
कोख़ में अजन्मी मारी जाए…
फिर भी बेकार की उम्मीदों में…
नारी तू क्यू है मदहोश…???

बेमतलब है ये करवाचौथ…
ये है कैसा करवाचौथ..????

नारी अब ना कर तू करवाचौथ…
ये है कैसा करवाचौथ…???

नारी तुझे अपनीं बातें कहना है…
अब ना यूँ चुप रहना है…
छोड़ ढोना कुरीति-पाखण्ड…
अब ना कर तू कोई संकोच…।।

छोड़ दे दोहरे मापदंड का करवाचौथ…
ये है कैसा करवाचौथ…???

पंचशील पथ का जीवनसाथी हो…
नारी हो साथी के माथे का तिलक…
जो पंचशील की राह नहीं…तो…
किस बात का करवाचौथ…???

बंद करो यह करवा चौथ….
बोलो ! कैसा करवाचौथ…???
नहीं चाहिए खोखला करवाचौथ…।।

मेंहदी-चूड़ी-बिछुआ-कंगन के…
साज-श्रृंगार में…सजी हुई
ना गवां तू अपना जीवन…
साथी संग कर तू बुद्ध को नमन…।।

ऐसा सजीला हो करवाचौथ…
हाँ; ऐसा ही हो करवाचौथ…।।

माफ़ करना मेरे जीवनसाथी…
हैं हम-तुम दोनों “दीया-बाती”.
पर न करना तुम मेरे लिये…
अब तो कोई व्रत-प्रदोष…।।

छोड़ दो अब करवाचौथ…
मत करना तुम करवाचौथ…।।

अब समझो मेरे जीवनसाथी…
पथरीले रास्ते पर तेरे संग…
जीवन भर तेरे साथ चलूंगा..
धूप में ठंढी हवा बनूँगा …।।

पर;अब…मत करना…मत करना…
आडम्बरयुक्त ये करवाचौथ…।।

तेरे राहों के काँटों को…
अपनीं पलकों से चुन लूंगा…
पंचशील पथ पर तेरे संग चलूंगा…
मानवता की ख़ातिर मैं खुद को अर्पण कर दूँगा…।

पर;अब…मत करना…मत करना…
आडम्बरयुक्त ये करवाचौथ…।।

– रचनाकार उदय कुमार गौतम